. Sri Guru Granth Sahib Verse
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Sri Guru Granth Sahib Verse

ਨਾਨਕ ਤਿਨ ਕੈ ਸਦ ਕੁਰਬਾਣੇ ॥੪॥੨॥੨੦॥

Nanak is forever a sacrifice to them. ||4||2||20||

नानक तिन कै सद कुरबाणे ॥४॥२॥२०॥


ਤੇਰੀ ਕੀਮਤਿ ਤੂਹੈ ਜਾਣਹਿ ॥

You alone know Your value.

तेरी कीमति तूहै जाणहि ॥


ਤੂ ਆਪੇ ਬੂਝਹਿ ਸੁਣਿ ਆਪਿ ਵਖਾਣਹਿ ॥

You alone understand, You Yourself speak and listen.

तू आपे बूझहि सुणि आपि वखाणहि ॥


ਸੇਈ ਭਗਤ ਜੋ ਤੁਧੁ ਭਾਣੇ ॥

They alone are devotees, who are pleasing to Your Will.

सेई भगत जो तुधु भाणे ॥