. Sri Dasam Granth Sahib Verse
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Sri Dasam Granth Sahib Verse

ਯਹ ਜਬ ਭਨਕ ਚੋਰ ਸੁਨਿ ਪਾਈ ॥

यह जब भनक चोर सुनि पाई ॥


ਫੂਲਿ ਗਯੋ ਬਸਤ੍ਰਨ ਨਹਿ ਮਾਈ ॥

When the thief heard their talk, his joy found no bounds,

फूलि गयो बसत्रन नहि माई ॥


ਜਾਇ ਬਨਿਕ ਕੋ ਪੂਤ ਕਹੈਹੋਂ ॥

जाइ बनिक को पूत कहै हो ॥


ਯਾ ਕੈ ਮਰੇ ਸਕਲ ਧਨ ਲੈਹੋਂ ॥੫॥

(He thought,) ‘I will become the son of the Shah and after his death, I will own all the riches.’(5)

या कै मरे सकल धन लैहो ॥५॥