. Sri Dasam Granth Sahib Verse
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Sri Dasam Granth Sahib Verse

ਕੇਵਲ ਅੰਗ ਰੰਗ ਤਿਹ ਰਾਚੈ ॥

केवल अंग रंग तिह राचै ॥


ਏਕ ਛਾਡਿ ਰਸ ਨੇਕ ਨ ਮਾਚੈ ॥

एक छाडि रसनेक न माचै ॥


ਪਰਮ ਤਤੁ ਕੋ ਧਿਆਨ ਲਗਾਵੈ ॥

परम त्त को धिआन लगावै ॥


ਤਬ ਹੀ ਨਾਥ ਨਿਰੰਜਨ ਪਾਵੈ ॥੧੮੦॥

When the merger will be in only one and the mind will not be obsurbed in anyone else accept the ONE and meditate only on the supreme esselce, then it will realise the lord ( Nath Niranjan-the Unmanifasted brahman) 180

तब ही नाथ निरंजन पावै ॥१८०॥